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मुर्गीपालन कर हर महीने दस हजार कमा रही हैं महिलाएं

मुर्गीपालन कर हर महीने दस हजार कमा रही हैं महिलाएं
स्वसहायता समूह के जरिए महिलाओं के अपने पैरों पर खड़े होने के किस्से अब छत्तीसगढ़ में आम हो गए हैं। महिलाएं स्वसहायता समूह बनाकर न केवल रोजगार हासिल कर रही हैं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रू से मजबूत भी हो रही हैं। धमतरी जिले के बगौद की महिलाओं ने भी स्वसहायता समूह के माध्यम से सफलता की इबारत लिखी है। कभी मजदूरी करने वाली महिलाएं अब स्वरोजगार कर हर महीने दस हजार रूपए कमा रही हैं। हमर छत्तीसगढ़ योजना में अपने साथी पंचों के साथ अध्ययन प्रवास पर रायपुर आईं धमतरी जिले की बगौद पंचायत की पंच श्रीमती योगेश्वरी साहू बताती हैं कि उनके गांव की महिलाएं स्वसहायता समूह बनाकर मुर्गीपालन कर रही हैं। इस धंधे से हर महीने वे दस हजार रूपए कमा रही हैं। वे बताती हैं कि खेती-मजदूरी करने वाली 15 महिलाओं ने संगठित होकर कुछ नया करने की ठानी और जय चंडी महिला स्वसहायता समूह का गठन किया। समूह की महिलाओं ने ‘विहान’ योजना के तहत मुर्गीपालन के लिए एक लाख 40 हजार रूपए का ऋण लिया। पंच श्रीमती योगेश्वरी साहू बताती हैं कि स्वसहायता समूह की महिलाएं अपने मुर्गीपालन के व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए काफी मेहनत कर रही हैं। इलाके में देशी मुर्गी की मांग अच्छी होने से उनका धंधा दिन-ब-दिन जोर पकड़ते जा रहा है। ग्राहकी बढ़ने से समूह की कमाई में बढ़ोतरी हो रही है। मांग के अनुरूप आपूर्ति हो सके, इसके लिए महिलाएं कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। मुर्गीपालन का काम शुरू करने के बाद से समूह के महिलाओं की माली हालत सुधर रही है। धंधे को आगे बढ़ाने और इसके सुचारू संचालन में उन्हें अब परिवार का भी सहयोग मिल रहा है।