हमारी कहानी - हमारी जुबानी

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महिलाओं के जीवन में हुआ “उजाला”

स्व-सहायता समूह से सशक्तिकरण बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के ग्राम पंचायत बरतीकला के भूतपूर्व सरपंच श्री जलोधर प्रसाद बताते हैं कि हमारे गाँव में ग्रामवासियों के पास कृषि के अलावा रोजगार का अन्य कोई साधन नहीं था। खेती-किसानी के समय ही कुछ महीनों के लिए ग्रामवासी व्यस्त रहते और साल के 8-9 माह व्यर्थ के कार्यों में बीत जाते थे। ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के सीमित विकल्प होने के कारण पुरुष तो आसपास के कस्बों में काम ढूंढने चले भी जाते थे, जिससे वे कुछ न कुछ रोजगार कर लेते थे, पर ग्रामीण महिलाओं के लिए यह बड़ी समस्या थी कि चौका-चूल्हा, बच्चों की देखभाल के अलावा खाली समय में ऐसा कोई कार्य न था, जिससे वे अपने जीवन को सार्थक कर पातीं। गाँव–घर में ही रोजगार प्राप्त होने पर उनके श्रमशक्ति का उचित उपयोग हो सकता था। वे आगे कहते हैं कि गाँव की ही कुछ महिलाओं ने अपने महत्त्व को पहचाना। कुछ महिलाओं के साथ समूह बनाकर रोजगार तलाशने और अवसर बनाने के लिए उजाला समिति का गठन किया। शुरुआत में महिलाओं को अपने परिवार की बुजुर्ग महिलाओं के विरोध का सामना भी करना पड़ा। बुजुर्गों के विचार थे कि समूह का गठन समय की बर्बादी है और यह सब घूमने–फिरने और व्यर्थ परिचर्चा करने का बहाना है। पर जब उजाला समिति के गठन के बाद उनके व्यवस्थित कामकाज को देखा, तब उनकी सोच स्व-सहायता समूह के प्रति बदली और आज वे इनकी मुक्तकंठ से प्रशंसा करती हैं। उजाला समिति ने बहुत ही कम समय में अपने कार्यों की वजह से ग्रामवासियों के बीच विश्वास कायम किया है. वर्तमान में यह समिति सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत सोसायटी का संचालन हमारे ग्राम पंचायत में कर रही है। समय पर ऋण वापसी के कारण प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से उन्हें ढाई लाख का अनुदान प्राप्त हुआ है। समिति के कार्यक्रमों में महिलाओं में सामाजिक कार्यों के प्रति रूचि बढ़ी है और आर्थिक सहायता भी मिली है. उजाला समिति हमारे ग्राम पंचायत का नाम रोशन तो कर ही रही है, साथ ही महिलाओं के जीवन में भी उजाला हुआ है। हमर छत्तीसगढ़ योजना में राजधानी और नया रायपुर का अध्ययन-भ्रमण कर वे बेहद प्रसन्न हैं. वे कहते हैं कि राज्य शासन की यह बहुत ही अच्छी पहल है. भूतपूर्व सरपंच होने के बावजूद मुझे यहाँ आने का अवसर मिला। इस योजना का उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों को विकास कार्य के लिए प्रेरित करना है, साथ ही योजनाओं का उचित क्रियान्वयन हो सके।


बेसहारा महिलाओं का सहारा विधवा पेंशन

रायपुर, 7 अक्टूबर. ऐसी परिस्थिति आपके सामने आ जाती है, जब लगता है कि आपके पास कोई रास्ता नहीं बचा. गुजर-बसर के लिए, परिवार पालने के लिए ऐसी विषम परिस्थिति में फंसना किसी भी इंसान की हिम्मत तोड़ सकता है. यह परिस्थिति तब और विकट हो जाती है, जब किसी का जीवनसाथी बीच रास्ते में ही साथ छोड़ दे. आकस्मिक मृत्यु किसी भी परिवार के लिय असहनीय विपदा होती है. खासकर घर का वह सदस्य, जो पालक- पोषक होता है. वही न रहे, तब समस्या और गंभीर हो जाती है. ऐसी ही विकट परिस्थिति हर गाँव के कुछ घरों ने देखी है. तब शासन की पेंशन योजना बड़ी राहत देती है. जिला रायपुर के विकासखंड अभनपुर के ग्राम पंचायत कोलर के पंच श्री पवन कुमार साहू आगे बताते हैं कि इस प्रकार के विकट परिस्थिति उस परिवार की माली हालात बहुत ख़राब हो जाती है. खासकर ग्रामीण क्षेत्र में परिवार के पालक पुरुष ही होते हैं, महिलाओं का काम घर और बच्चों की देखभाल करना ही होता है. अचानक घर सम्हालने की जिम्मेदारी महिला पर आना इनके लिए किसी आघात से कम नहीं होता. ऐसे वक्त में इंदिरा विधवा पेंशन योजना इन महिलाओं का सहारा बनती है. इस योजना में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले, 40 वर्ष या इससे ज्यादा उम्र की महिलाओं को 350 रूपये प्रति माह आर्थिक सहायता दी जाती है. पंच श्री साहू कहते हैं कि यह राशि महिलाओं को सम्मानपूर्ण अपना गुजर- बसर करने में सहायक होती है. अब तक हमारे ग्राम पंचायत की ऐसी 5 महिलाओं को इंदिरा विधवा पेंशन मिल रहा है. इस योजना के साथ अन्य पेंशन योजना जैसे वृद्धा पेंशन योजना, निःशक्तजन पेंशन योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना आदि से गाँव के 184 लोगों को आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है. हमर छत्तीसगढ़ योजना अध्ययन-भ्रमण कार्यक्रम में बारे में पंच श्री साहू अपना अनुभव बताते हैं कि हम जैसे साधारण पंच कभी राजधानी देख पाएंगे, यह सोचा भी नहीं था. हमर छत्तीसगढ़ योजना में ये सुअवसर प्राप्त हुआ. नया रायपुर का विकास और वैभव सम्मोहित करने वाला है. यहाँ की साफ–सुथरी सड़कें और व्यवस्था देखकर हमें भी प्रेरणा मिली कि अपने ग्राम पंचायत के विकास में भागीदार बनें और राज्य की प्रगति में सहयोग करें.


एक पंथ दो काज - गाँव की जरूरत पूरी, महिलाओं को आर्थिक लाभ

मत्स्य पालन के माध्यम से स्व-सहायता समूह को मिला रोजगार हमारा पंचायत बेहद जागरूक है. मुख्यतः गाँव की महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए अथक प्रयास कर रही हैं। महिला सशक्तिकारण के दौर में सभी एकजुट होकर विभिन्न उपक्रमों के जरिये आर्थिक बदहाली दूर करने में जुटी हुई हैं. कोरबा जिले के ग्राम पंचायत पुटी पखना के सरपंच श्री चन्द्रप्रताप पोर्ते बताते हैं कि हमारे गांव में जय मां मातिन दाई महिला स्व-सहायता समूह है,जिसमें 12 महिला सदस्य हैं. इस समूह की अध्यक्ष श्रीमती फुलबसिया पेंद्रो हैं. समूह शासन के नियमों के तहत पंजीकृत है. समूह के सदस्यों ने दो तालाबों में मछली पालन शुरू किया है, जिसमें एक तालाब 5 एकड़ एवं दूसरा तालाब 7 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है. समूह को मछली पालन की प्रेरणा जनपद पंचायत से मिली. पंचायत की बैठक में मत्स्य पालन के संबंध में जानकारी दी गई। समूह के सदस्यों को मत्सय पालन का प्रशिक्षण नवम्बर 2016 में दिया गया। अब इस समूह की सदस्य महिलाएं समय-समय पर मत्सय विभाग से सहयोग से जानकारियों से अवगत होती रहती हैं. वे कहते हैं कि महिला स्व-सहायता समूह में सभी सदस्य गरीब परिवार से संबधित हैं. घर का कामकाज, चूल्हा-चौका, बच्चों की देखभाल में ही इनका अधिकतर समय गुजर जाता था. साथ ही आर्थिक रूप से भी वे सशक्त नहीं थीं. ग्राम पंचायत के प्रयास से और इन महिलाओं की इच्छाशक्ति की वजह से जय मां मातिन दाई समूह का गठन हुआ और महिलाओं ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में कदम रखा. मछली पालन करने से पहले शासन की योजना के तहत इन दो तालाबों का सौन्दर्यीकरण कराया गया। सरपंच ने बताया कि बाजार में 400 रूपये प्रतिकिलो में मछली बीज मिलता है, समूह के सदस्यों द्वारा अगस्त में मछली बीज तालाब में डाला जाता है. फरवरी-मार्च में मछली निकालते हैं और बाजार में उचित दर पर विक्रय कर देते हैं। समूह को नवम्बर 2016 में कोरबा के मत्स्य विभाग के सहयोग से छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक से ऋण मिला. मत्स्य व्यवसाय से जो आमदनी होती है, उससे सभी सदस्यों को आर्थिक लाभ मिलता है. साथ ही फिर से मछली बीज भी खरीदते हैं. अपने क्षेत्र के बारे में चर्चा करते हुए सरपंच श्री पोर्ते ने बताया कि हमारे क्षेत्र में बड़ी संख्या में आदिवासियों की जनसंख्या है. इन परिवारों में मछली विशेष तौर पर बेहद पसंद की जाती है. ग्रामीणों के लिए मत्स्य पालन व्यवसाय का एक अच्छा जारिया है. गाँव की महिलाओं को समय रहते यह बात समझ में आई कि क्यों न हम ऐसा व्यवसाय करें, जिससे ग्रामवासियों की भी जरूरत पूरी हो और हमें भी आर्थिक लाभ मिले।


आजीविका मिशन से कुटीर उद्योग को बढ़ावा मिला

हमर जिनगी म होईस नवा बिहान रायपुर 20 सितम्बर। राजनांदगांव जिले के ग्राम पंचायत तुमड़ीलेवा की पंच श्रीमती तामेश्वरी साहू हमर छत्तीसगढ़ अध्ययन-भ्रमण यात्रा के दौरान राजधानी एवं नया रायपुर का विकास देखकर बेहद प्रभावित हैं. वे अपने गाँव के बारे में बातचीत करते हुए बताती हैं कि हम जैसी ग्रामीण महिलाएं ज्यादा समय घर में ही व्यतीत करती हैं। ज्यादातर समय घर-परिवार के देखभाल में बिताती हैं। घरेलू कार्यों को निपटाने के बाद काफी समय बच जाता था। इस समय का सदुपयोग कैसे करें? इस सवाल का जवाब नहीं मिल पा रहा था। हमारे गाँव की महिलाओं के साथ ही साथ आसपास के गाँव की महिलाओं के पास भी खाली वक्त बेकार बिताना मज़बूरी थी। साथ ही आय का कोई स्रोत न होने के कारण हम महिलाओं को हर छोटे–बड़े खर्चों के लिए परेशानी होती थी। विपरीत समय आने पर अपने परिवार की कुछ मदद भी नहीं कर पाते थे। अपनी इन परेशानियों को दूर करने के लिए हम कुछ काम शुरू करने के बारे में विचार कर रहे थे। तब हमारे विचारों को मूर्तरूप देने का कार्य किया छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान योजना” ने। जिसमें महिला समूह बनाकर विभिन्न कुटीर उद्योग की शुरुआत अपने गाँव में ही कर सकते हैं। श्रीमती साहू आगे बताती हैं कि ग्राम पंचायत तुमड़ीलेवा में 30 समूह सक्रिय हैं और आश्रित ग्राम परेवाडीह के 13 महिला संगठन बिहान योजना से जुड़े हैं। जिसका कलस्टर पदुमतरा से विभिन्न कुटीर उद्योग जैसे दोना-पत्तल निर्माण, अगरबत्ती निर्माण, बैग, झोला निर्माण आदि कार्य करते हैं। वर्तमान में हमारे ग्राम पंचायत की अधिकतर महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं। पूर्व की परेशानियों जैसे आर्थिक विपन्नता, साहूकारों से कर्ज लेने की मज़बूरी, समय का सदुपयोग नहीं कर पाना, इच्छाओं की पूर्ति नहीं कर पाना, इन सभी समस्यायों का निराकरण हो गया। सीईओ श्रीमती रोशनी टोप्पो समय समय पर हमारे पंचायत के महिला संगठनों को प्रोत्साहित करती रहती हैं।


दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल विकास योजना से दूर हुई बेरोजगारी

युवाओं ने सीखा हुनर, मिला रोजगार शौचालय निर्माण में किया सहयोग हमर छत्तीसगढ़ योजना में अध्ययन-भ्रमण पर आए कोरिया जिले के ग्राम पंचायत उमझर के सरपंच श्री बसंत सिंह बताते हैं कि उनके गांव में कुछ समय पहले ऐसे युवा, जो किसी कारणवश पढ़ाई छोड़ चुके हैं. उनके पास कोई रोजगार नहीं था. खेत-खलिहान के कार्यों में उन्हें ज्यादा रुचि भी नहीं रहती थी. कार्य करने की क्षमता तो थी, लेकिन कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था. ऐसे में दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल विकास योजना से न सिर्फ उन्हें अपना कौशल निखारने का मौका मिला, बल्कि प्रशिक्षण के बाद उन्हें रोजगार भी मिला. प्रशिक्षण पाने के बाद इन युवाओं ने गाँव में शौचालय निर्माण में बड़ी भूमिका निभाई है. शासन की इस महत्वपूर्ण योजना ने कई बेरोजगारों को सही राह दिखाई है. सरपंच श्री सिंह बताते हैं कि वर्तमान समय में युवाओं की रूचि खेती-किसानी के प्रति लगातार कम हुई है. ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के कोई बड़े उपक्रम तो होते नहीं कि पढ़-लिखकर युवा वर्ग वहां नौकरी कर लें. रोजगार के संसाधनों में भी कार्य कुशल लोगों की मांग है. ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के कम पढ़े-लिखे युवाओं के लिए कोई रास्ता नहीं रह जाता और वे या तो मजदूरी करके अपना जीवन यापन करते हैं या फिर गलत रास्ते पर चलने लगते हैं. हमारे गाँव में भी बहुत से युवा बेरोजगार थे. राज्य शासन की महत्वपूर्ण योजना के तहत गांव से 6 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय बैकुंठपुर में दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल प्रशिक्षण केंद्र का खुलना जैसे उनके लिए नई उम्मीद लेकर आया. आगे बढ़ने का लिए एक रास्ता सूझ गया. पंचायतों में ग्रामीण कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण के बारे में जब पता चला, तो हमने अपनी पंचायत में ऐसे युवाओं की तलाश की और खाली घूम रहे युवकों को प्रशिक्षण दिलाने की पहल की. वे कहते हैं कि बहुत से लोग सरकार की योजनाओं से डरते थे, समझते थे कि इससे कुछ नहीं होने वाला. लेकिन गाँव के 14 युवाओं ने प्रशिक्षण में हिस्सा लिया. कौशल प्रशिक्षण केंद्र बैकुंठपुर में छह माह के लिए प्रशिक्षण हेतु बुलाया गया, आठवीं से दसवीं तक की शिक्षा प्राप्त 6 युवाओं को योग्यतानुसार ईंट निर्माण हेतु प्रशिक्षण दिया गया. तीन युवा मैकेनिकल इंजीनियरिंग का प्रशिक्षण ले रहे हैं. चार युवकों ने राजमिस्त्री का 6 माह तक प्रशिक्षण लिया. सौभाग्य की बात उनके लिए यह थी कि उसी समय गांव में सभी के घरों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण का कार्य किया जा रहा था. पंचायत के समक्ष अधिक फंड तो नहीं था कि वह किन्ही अन्य मिस्त्रियों से ईंट निर्माण करवाएं. अतः इन 6 युवाओं को ही गांव के शौचालय निर्माण हेतु ईंट बनाने का ठेका दिया गया, जिससे इन युवाओं को भी अपना हुनर आजमाने और रोजगार पाने का मौका मिल गया. करीब 3 माह में ही उन्होंने शौचालय निर्माण हेतु 2 लाख ईंट का निर्माण कर लिया. इसका सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि इन युवाओं को रोजगार मिल गया और पंचायत को ईंट निर्माण करवाने से राहत मिली और राशि की बचत भी हुई. राजमिस्त्री का प्रशिक्षण ले रहे युवा भी 6 माह के बाद प्रशिक्षित हो गए, जिससे उन्हें गांव के शौचालयों का निर्माण का मौका दिया गया. इन सभी युवाओं ने गांव के पूरे ढाई सौ घरों में शौचालय निर्माण कर पंचायत की बड़ी सहायता की. ग्राम पंचायत को खुले में शौचमुक्त ग्राम बनाने में मदद मिली. इनकी सफलता से गाँव के अन्य युवा भी उत्साहित हैं और विभिन्न विधाओं में प्रशिक्षण लेने के लिए तैयार हो रहे हैं. शासन की इस एक योजना से कई तरह के फायदे हमारी पंचायत और ग्रामवासियों को मिले हैं.


विद्युत सुविधा से साल भर में बड़ा परिवर्तन

मुख्यमंत्री मजरा-टोला विद्युतीकरण योजना छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद पंचायती राज के तहत हुए चुनावों में हम तीन कार्यकाल से पंच बनते रहे हैं. हमारे गांव में बिजली की सुविधा नहीं थी. साल भर पूर्व मुख्यमंत्री मजरा-टोला विद्युतीकरण योजना के तहत बिजली सुविधा मिली, जिससे ग्रामवासियों की जीवनशैली में बड़ा बदलाव आया है. कोंडागांव जिले के फरसगांव विकासखंड ग्राम पंचायत जैतपुरी के श्री नेगीराम नेताम 80 बरस के हैं. पंचायत चुनाव में तीन बार जीतकर पंच बने हैं। हमर छत्तीसगढ़ योजना में अध्ययन-भ्रमण पर आए श्री नेताम बताते हैं कि गाँव में करीब 1500 की आबादी है. जब से जन्म लिया और दुनियादारी समझने लगे, तो देखा कि हम पुराने जमाने के तौर-तरीकों पर ही आश्रित थे. चिमनी के टिमटिमाते उजाले में पूरी जिंदगी बिताई. बिजली न होने से हमें कितना नुकसान हो रहा है, इसका अंदाजा भी नहीं था. देश-दुनिया आगे बढ़ रहे थे, लेकिन हमारे गांव में बिजली नहीं थी. बिना विद्युत व्यवस्था के देर रात तक जागता भी कौन! शाम 8 बजते ही लगता था कि बहुत रात हो चुकी है. ग्रामवासी अपने घर के दरवाजे बंद करके सो जाते. रात का उपयोग भी किया जा सकता है, ऐसा तो कभी सोचते ही नहीं थे. श्री नेताम बताते हैं कि ऐसे में जब गांव के युवाओं को बिजली की असुविधा का एहसास होने लगा, तो बहुत प्रयास किए गए, लेकिन दूरस्थ अंचल होने के चलते इतने साल बीत जाने के बाद भी गांव में बिजली की सुविधा नहीं मिल रही थी. बारिश न होती तो गांव में अकाल पड़ जाता, बच्चे दिन भर जैसे-तैसे स्कूल में बिताने के बाद शाम को घर लौटते और थोड़ी ही देर में अँधेरा हो जाता. फिर चिमनी या लालटेन में पढ़ाई करना कठिन था. विगत वर्ष 2016 में जब मुख्यमंत्री मजरा टोला विद्युतीकरण योजना के तहत हमारे गाँव में बिजली की सुविधा उपलब्ध कराई गई, तो गांव में दिवाली सा माहौल हो गया. अब तो विद्युत सुविधा से आधुनिक साधनों का उपयोग भी होने लगा है. श्री नेताम कहते हैं कि गांव में बिजली आई तो ग्रामवासियों के रहन-सहन में भी बदलाव आ गया. पानी की सुविधा, मनोरंजन के साधन, बच्चों की पढ़ाई, खेती-किसानी के लिए सिंचाई की सुविधा और भी बहुत कुछ. देर शाम अँधेरा होने के बावजूद बच्चे बिजली को रोशनी में पढ़ रहे हैं. बारिश न हुई तो किसान बारिश मोटर पंप चलाकर सिंचाई कर लेते हैं. मोबाइल, जिसके बारे में हमने कभी सोचा भी नहीं था. ऐसी संचार सुविधा गांव में उपलब्ध होने लगी. हम दूर गांव में रहनेवाले अपने रिश्तेदारों से बात कर पाते हैं. बिजली की सुविधा ने एक साल में ही बड़ा परिवर्तन ला दिया है गाँव में. अब जाकर मालूम पड़ रहा है कि विद्युतीकरण हर एक गांव के लिए कितना आवश्यक है! हमारा गांव मुख्य मार्ग से जल्द ही जुड़ जाएगा, जिससे आवागमन की सुविधा भी बेहतर हो जाएगी. अध्ययन-भ्रमण यात्रा के अनुभव साझा करते हुए वे कहते हैं कि इतने सुविधा सम्पन्न हो चुके नया रायपुर और राजधानी को देखना हम लोगों के लिए सपने पूरे होने जैसा है. बड़ी-बड़ी इमारतें, लम्बी चौड़ी सड़कें, ढेर सारी गाड़ियाँ और बहुत कुछ देखा, जो गाँव में रहते कभी सोच भी नहीं सकते थे. हमर छत्तीसगढ़ योजना ने उम्र के इस पड़ाव में भी हमें बड़ी ख़ुशी दे दी है.


प्रधानमंत्री ने दिया था स्वच्छता सम्मान

स्वच्छता के लिए प्रतिबद्ध ग्राम पंचायत जूनाडीह जिला सरगुजा के लखनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत जूनाडीह की सरपंच श्रीमती उर्मिला तिग्गा बताती हैं कि ग्राम पंचायत जूनाडीह लखनपुर से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर है. नया पंचायत होने के कारण विकास स्तर धीमा था. गाँव में पंचायत भवन भी नहीं था. ऐसे पंचायत में ग्रामवासियों को हर चीज के लिए समस्या और असंतुष्टि हो रही थी. सरपंच होने के नाते पंचायत को जल्द विकसित करने का लक्ष्य सामने था और सबसे बड़ी चुनौती थी पंचायत में पूरे 450 घरों में शौचालय का निर्माण कराना, क्योंकि पिछड़ा और कम शिक्षित क्षेत्र होने के कारण यहां के लोग शौचालय के उपयोग को अच्छा नहीं समझते थे. घर में शौचालय होना बहुत ही शर्मनाक समझा जाता था. श्रीमती तिग्गा कहती हैं कि ऐसे गांव में महज 2 माह में ग्रामवासियों को समझाइश देकर 450 शौचालय का निर्माण करना बहुत ही कठिन काम था. पंचायत के कुछ शिक्षित जनों, पंचों एवं मितानिनों के मदद से पूरे गांव को इतने कम समय में खुले में शौचमुक्त कर हमने गांव को, ब्लॉक में ही नहीं, अपने जिला सूरजपुर को भी नई पहचान दी है. हमें स्वयं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने स्वच्छता सम्मान से सम्मानित किया. साथ ही हमारे क्षेत्र के कलेक्टर ने भी गांव की इस उपलब्धि की सराहना की. वे कहती हैं कि गांव में स्वच्छता प्रेरक समूह बनाकर प्रत्येक ग्रामवासी को शौचालय उपयोग करने हेतु प्रेरित कर हम अपने गांव को खुले में शौचमुक्त बनाएं, पंचायत क्षेत्र को स्वच्छ रखें. यह योजना बनाकर सभी पंचों, सदस्यों के साथ मिलकर गांव के हर गली-मोहल्ले को सप्ताह में एक दिन स्वच्छ करने का निर्णय लिया. हमने अपने ग्रामवासियों के सहयोग से स्वच्छ भारत मिशन में संपूर्ण सहभागिता निभाई है. स्वच्छ भारत मिशन के अधिकारियों ने निरीक्षण कर हमारे गांव को, ब्लॉक का प्रथम स्वच्छ एवं खुले में शौचमुक्त ग्राम चुना. 10 अगस्त 2016 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने हमें सम्मानित किया था। अब गांव का एक बच्चा भी खुले में शौच नहीं करता तथा गांव स्वच्छ, सुंदर बन गया है, जिससे गांव की सूरत बदल चुकी है. नया पंचायत होने के बावजूद हमारा गाँव अपनी पहचान बना रहा है. प्रधानमंत्री जी से स्वच्छता सम्मान पाने के बाद लोगों का ध्यान हमारे ग्राम पंचायत पर गया. गांव में पंचों और अन्य महिलाओं की मदद से समूह बनाकर अब खुले में शौच जाने वालों के लिए 500 रुपये जुर्माना रखा गया है तथा समूह के सदस्य दिन-रात खुले मैदानों में जाकर पहरा देकर गंदगी करने से रोकते हैं. शासन की योजनाओं से हुए ग्राम विकास के बारे में उनका कहना है कि गांव की हर गली में सीसी रोड निर्माण हो चुका है, पानी की सुविधा के लिए गांव में वृहद ओव्हरहेड टंकी निर्माण किया गया है. कौशल विकास योजना के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण केंद्र संचालित है, जिसमें खासकर गांव की युवतियों एवं विधवा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु सिलाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. हाईस्कूल उन्नयन से गांव के बच्चों में पढ़ाई के प्रति रूचि बढ़ा दी है. गांव में अतिथियों और सामाजिक कार्य हेतु समग्र विकास योजना अंतर्गत सार्वजनिक भवन एवं सार्वजनिक शौचालय का भी निर्माण किया गया है. सामूहिक भवन से ग्रामीणों को मांगलिक कार्यक्रम के दौरान सुविधा मिल रही है. जो ग्रामीण शौचालय नहीं बनवा पाए हैं, वे सार्वजनिक शौचालय का उपयोग कर रहे हैं. इससे गांव का माहौल साफ-सुथरा है और हम सब बेहद गर्वित महसूस कर रहे हैं।


बुजुर्गों का सहारा वृद्धा पेंशन योजना

किसी भी व्यक्ति के लिए ढलती उम्र सबसे बड़ा डर होता है और जो उम्र के अंतिम पड़ाव पर होते है, उन्हें अपने परिवार से काफी उम्मीदें होती हैं. वृध्दावस्था में परिजन उनका ख्याल रखें और उनकी आर्थिक जरुरतों को पूरा करें। गरीब परिवारों में अपने बुजुर्गों लिए आर्थिक असुरक्षा की अधिकतम संभावना रहती है। इन परिस्थितियों में जब बुजुर्ग अपने आप को विवश और असहाय पाते हैं, तो आर्थिक सहायता मांगना इनकी मजबूरी होती है। अपने छोटे–मोटे खर्चो को चलाना बुजुर्गों के लिए काफी मुश्किल रहता है। ऐसे वृध्दों के लिए शासन की वृध्दावस्था पेंशन योजना ने बड़ी राहत दी है. जिला जांजगीर–चाम्पा के डभरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बघौद की पंच श्रीमती गीता साहू बताती हैं कि ज्यादातर ग्रामीण बुजुर्ग मुश्किल हालातों का सामना कर रहे थे। अपने व्यक्तिगत खर्चो के लिए दूसरों पर निर्भर रहने की मज़बूरी में बुजुर्ग अपनी इच्छाओं को मारने के लिए विवश थे। इन समस्याओं का हल मिला “इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय वृद्धा पेंशन योजना” से. जिसके तहत बुजुर्ग व्यक्ति, चाहे वह महिला हो या पुरुष, गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों को हर माह शासन के नियमानुसार पेंशन दी जाती है। श्रीमती साहू बताती हैं कि हमारे गाँव की 63 साल की बुजुर्ग महिला श्रीमती दशमत यादव आर्थिक रूप से बेहद परेशान थीं. अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए इन्हें सोचना पड़ता था। अब इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय वृद्धा पेंशन योजना के तहत पेंशन पाकर बहुत खुश हैं। उन्हें कुछ रूपए के लिए हाथ फ़ैलाने नहीं पड़ते, छोटी-मोटी बीमारियों के इलाज स्वयं कराने में सक्षम है। दशमत जैसे अन्य बुजुर्ग भी हैं गाँव में, जिन्हें पेंशन योजना से सहारा मिला है. “इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय वृद्धा पेंशन योजना” मेरे विचार से एक प्रभावशाली योजना है। इससे हमारे बुजुर्गों के आत्मसम्मान की रक्षा होती है, साथ ही उन्हें आर्थिक मदद भी मिल जाती है। हमर छत्तीसगढ़ योजना में भ्रमण-अध्ययन के बारे में श्रीमती साहू कहती हैं कि राज्य शासन की अभिनव पहल है, जिसके तहत हमें राजधानी एवं नया रायपुर को देखने-समझने का मौका मिलना सौभाग्य की बात है। पंच बनने के बाद गाँव के विकास कार्य से जुड़ना अच्छा अनुभव रहा है। यहाँ आकर अपने कर्तव्यों को और भी अच्छी तरह से जाना-समझा। इसके लिए राज्य सरकार को धन्यवाद।


नल-जल योजना से ग्रामवासियों को सुविधा

डोंगरियाकला गाँव के पास नदी बहती है, फिर भी यह गाँव प्यासा रहता था। भूजल स्तर बहुत नीचे था। गर्मियों में यह परेशानी दिनों–दिन बढ़ती जाती। पीने के पानी के लिए गाँव–घर की महिलाएं भोर से ही हैंडपंप के सामने कतार लगा कर अपनी बारी का इन्तजार करती थीं। इनसे उन्हें अन्य घरेलू कार्य करने में देरी भी हो जाती। गर्मियों में पेयजल की समस्या विकराल हो जाती थी। पेयजल की समस्या हमारे ग्राम पंचायत के अंतर्गत आश्रित सभी गाँवों की बड़ी परेशानी थी। इन सभी परेशानियों से मुक्ति दिलाने के लिए नल-जल योजना ही एक समाधान था। यह कहना है कबीरधाम जिले के डोंगरियाकला ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती सोनिया लांझी का। वे बताती हैं कि गाँव का भूजल स्तर बढ़ाने के लिए सबसे पहले नदी पर जल संवर्धन संरचनाओं का निर्माण करना आवश्यक था। इसके लिए भू-जल संवर्धन योजना द्वारा नदी में रिटर्निंग वाल बनाकर नदी के पानी के व्यर्थ बहाव को रोका गया। जिससे कुछ महीनों हमारे गाँव का भू-जल स्तर में सुधार आने लगा। नल –जल योजना के माध्यम से हमारे ग्राम पंचायत के 80% घरों में पाइपलाइन बिछाकर पेयजल पहुँचाया जा रहा है। जिससे यहाँ की महिलाए राहत की सांस ले रही है। इस तरह शासन की योजनाओं से और सजग ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों की वजह से हमारा गाँव निरंतर विकास की पथ पर अग्रसर है।


नौनिहालों के पोषण आहार पर ध्यान

आंगनबाड़ी भवन से हुई सुविधा रायगढ़ जिले के विकासखंड सारंगढ़ के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत ग्वालिनडीह की सरपंच श्रीमती दिलबाई यादव बताती हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याएं शहरी क्षेत्र से बिलकुल भिन्न होती हैं। बच्चों की देखभाल के प्रति जागरूकता में कमी, पोषक आहार की अनुपलब्धता के कारण कई बार बच्चे कुपोषण के शिकार हो जाते थे। इस समस्या से निजात पाने के लिए, शासन द्वारा संचालित योजनाएं कारगर होती हैं। इन्हीं योजनाओं में से एक है, समेकित बाल विकास सेवा योजना। जिसके व्यवस्थित और उचित संचालन के लिए हमारे ग्राम पंचायत एवं आश्रित गाँवों में सुविधा हेतु आंगनबाड़ी भवन निर्माण कराया गया। आंगनबाड़ी भवन के निर्माण से हमारे नैनिहालों को एक ऐसी छत मिल गई, जहाँ वे सामाजिक, शारिरिक और मानसिक विकास कर सकते हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित इस योजना से हमारे गाँव के बच्चों का चहुँमुखी विकास सुनिश्चित हुआ है। बच्चे आंगनबाड़ी भवन में आकर पोषक आहार पाते हैं और साथ ही साथ पढ़ना–लिखना भी सीखते हैं। बच्चों के साथ गर्भवती महिलाओं को भी पोषण–पूरक आहार का वितरण किया जाता है। सरपंच श्रीमती यादव कहती हैं कि पंचायत भवन का निर्माण भी उन्हीं के कार्यकाल में हुआ है। इससे पूर्व, पंच-सरपंच की बैठक और ग्रामसभा में असुविधा होती थी। अब ग्राम पंचायत का संचालन भी सुचारू रूप से होने लगा है। पंचायत भवन में पंचों एवं ग्रामवासियों के साथ बैठकर गाँव के विकास, योजनाओं, निर्माण कार्यों पर चर्चा करने में सुविधा हो रही है। ग्रामसभा की बैठक में अधिक से अधिक संख्या में लोग शामिल हों, ऐसा प्रयास करते हैं। वे अध्ययन-भ्रमण के अनुभव साझा करते हुए बताती हैं कि मैं पहले कभी रायपुर नहीं आई थी। यह पहला मौका था, जब हमारे राज्य की राजधानी देखी। यह मेरे लिए अनोखा अनुभव है. जिसकी हम कभी कल्पना भी नहीं कर सकते थे, उन विकसित स्थलों पर भ्रमण करने, करीब से देखने का अवसर मिला. मंत्रालय और छत्तीसगढ़ विधानसभा में नीतिगत निर्णय होते हैं, हमारे राज्य के लिए योजनाओं का निर्माण होता है। यह जानकर बहुत प्रसन्नता हुई.


चूल्हा फूंकने से मिली मुक्ति

उज्ज्वला योजना से पर्यावरण का बचाव, जंगल सुरक्षित हमारा ग्राम पंचायत प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण है. पेड़-पौधे, खेल-खलिहान वनोपज पर्याप्त है. पशुधन से प्राप्त उत्पादों का उपयोग ग्रामीण जनजीवन में सहज व्याप्त होता है. प्राचीन पध्दति में लकड़ी और गाय के गोबर से बने कंडे का उपयोग ईंधन के रूप में खाना बनाने में किया जाता रहा है. इससे निकला धुँआ खाना बनाने और उसके आस-पास रहने वालों के लिए हानिकारक होता है. खासकर बुजुर्ग और बच्चों को धुएं से आँखों में जलन और खाँसी जैसी समस्याएँ उत्पन्न होना आम बात है. इस सभी समस्याओं का समाधान हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने उज्जवला योजना के माध्यम से किया है. जिला कबीरधाम के विकासखंड पंडरिया अंतर्गत ग्राम पंचायत सोमनापुर की सरपंच श्रीमती गंगोत्रीबाई हमर छत्तीसगढ़ योजना में अध्ययन-भ्रमण पर रायपुर आई हैं. वे बताती हैं कि उज्ज्वला योजना के अंतर्गत 200 गैस कनेक्शन महिलाओं को प्रदान किया गया. इससे हमारे ग्राम पंचायत की महिलाएं धुएं से होने वाली परेशानियों से मुक्त हो गई हैं. प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने हम महिलाओं की परेशानी को समझा, न सिर्फ समझा, बल्कि उज्ज्वला योजना से इसका समाधान भी किया. इससे पर्यावरण का बचाव और जंगल भी सुरक्षित हो रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में खाना बनाने के लिए लकड़ियों का उपयोग अब कम होता जा रहा है. वे कहती हैं कि एक साधारण परिवार की महिला हूँ. आज तक सिर्फ अपने मायके ही गई थी. वह भी किसी न किसी के साथ ही गई थी, पर गाँव-घर से दूर शासन की योजना में अध्ययन-भ्रमण के लिए निश्चिन्त होकर आई हूँ. यहाँ काफी कुछ देखने-सीखने को मिला, उससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ गया. यहाँ जिन स्थलों भ्रमण हमने किया, वो सभी जगहें हमारे राज्य और जनता के लिए महत्वपूर्ण हैं. हमर छत्तीसगढ़ योजना बहुत महत्वपूर्ण महाभियान है.


बीमारी-गन्दगी से छुटकारा, समोदा ग्राम का सुन्दर नजारा

रायपुर जिले के विकासखंड आरंग के ग्राम पंचायत समोदा के सरपंच श्री शिवलाल साहू कहते हैं कि हमारे गांव की सरलता और व्यवस्थाएं आपको सहज ही आकर्षित कर लेंगी. पूर्व में, यहां भी कई तरह की समस्याएँ थी. नलकूप का पानी गली में भर जाता था. कच्ची नालियां बरसात के दिनों में ढह जाती, जिससे गली–मोहल्ले कीचड़ और गन्दगी से सराबोर रहते थे. सभी ग्रामीणों को इससे असुविधा होती थी. वे कहते हैं कि कीचड़ और गन्दगी कितनी सारी बीमारियों को न्योता देती है. ज्यादातर लोगों को इससे आर्थिक और मानसिक दोनों प्रकार से नुकसान उठाना पड़ता था. इन समस्याओं से बचने का उपाय करना पंचायत की प्राथमिकता में शामिल था. तब हमने मनरेगा योजना के अंतर्गत सीसी रोड और नाली निर्माण अपने गाँव में कराया. इन निर्माण कार्यों में अधिक समय नहीं लगा. कुछ ही महीनों में 5 सीसी रोड गाँव की गलियों में बनवा दिए. इससे हमारे गाँव की सुन्दरता में बढ़ोत्तरी हुई और बीमारियों की आशंका दूर हुई. सीसी रोड के साथ नाली निर्माण कार्य भी चला. जिससे पानी रोड में न बहे और आवागमन करने वालों को कोई असुविधा न हो. सरपंच श्री साहू बताते हैं कि गाँव के सौदर्यीकरण के पश्चात, खुले में शौच की प्रवृत्ति एक गंभीर समस्या थी, जिसका निराकरण जरूरी था. इसके लिए स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 300 शौचालयों का निर्माण 1 साल में किया गया. ताकि खुले में शौच करने की आदत बंद हो और गांव साफ–सुथरा बना रहे. इसके लिए वित्त की व्यवस्था विधायक मद से भी मिली. अब हमारा गाँव खुले में शौचमुक्त ग्राम बनने में अग्रसर है. हम अपने गाँव को विकसित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं.


प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से स्व-सहायता समूह की प्रगति

कांकेर जिले में विकासखंड नरहरपुर के ग्राम-पंचायत कन्हनपुरी की सरपंच श्रीमती कमलबत्ती नेताम बताती हैं कि उनके गाँव में खेती-किसानी ही आय का एकमात्र साधन हुआ करता था। वह भी केवल एक फसल की ही बोआई की जाती है। गाँव में रोजगार का अन्य साधन उपलब्ध न होने पर कृषि के बाद बचे समय का उपयोग नहीं हो पाता था। बचे हुए समय का उपयोग करने और साथ ही रोजगार के लिए, गाँव की कुछ महिलाओं ने स्व-सहायता समूह का गठन किया। इस समूह ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत बैंक से ऋण लेकर गाँव में ही किराने की दुकान खोली। इससे प्राप्त आय से ऋण भी चुकाया और 15 हजार रूपये अनुदान भी प्राप्त कर लिया। वे बताती हैं कि इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए गाँव में ही चाय-नाश्ते की छोटी सी होटल भी खोली है, जिसमें ज्यादातर ग्रामीण चाय-नाश्ते का लुफ्त उठाते हैं। इस प्रकार हमारे गाँव की महिलाओं ने न सिर्फ अपने आर्थिक विकास का ही रास्ता निकाला है, बल्कि ग्रामवासियों को सुविधा भी मिली। समूह के विकास की राह इतनी आसान नहीं थी, शुरुआत में इन महिलाओं को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ा। परिवार के बुजुर्ग सदस्य इन सब कार्यों की अनुमति देने में आनाकानी कर रहे थे. उन्हें समझाने में पंचो ने भी सहायता की, जिसके बाद वे राजी हो गए। आज वही इस समूह की बड़ाई करते नहीं थकते। राजधानी एवं नया रायपुर के अध्ययन-भ्रमण के अनुभव साझा करते हुए वे कहती हैं कि हमर छत्तीसगढ़ योजना आवासीय परिसर में आना और अध्ययन-भ्रमण कार्यक्रम का हिस्सा बनना अलग तजुर्बा है। नंदन वन जंगल सफारी, स्वामी विवेकानन्द विमानतल, इन्दिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ विधानसभा में बहुत कुछ सीखने को मिला। यह ज्ञानप्रद योजना है। इसके संचालन के लिए राज्य शासन बधाई का पात्र है।


प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से हो रहा आर्थिक विकास

विभिन्न उपक्रमों से ग्रामवासियों को मिला आमदनी का साधन ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से आर्थिक विकास के नए अवसर खुले हैं। जब से यह योजना अमल में आई है, तब से बड़ी संख्या में महिलाएं समूह बनाकर इससे जुड़ रही हैं। यहां के गांव कभी सुनसान हुआ करते थे, खेती-किसानी के अलावा रोजगार के कोई अन्य साधन नहीं थे। आर्थिक बदहाली का आलम था। मुद्रा योजना के चलते गांव में कम्प्यूटर सेन्टर, किराना दूकानें खुल गई हैं और साप्ताहिक बाजारों में तरह-तरह की वस्तुओं/सामग्रियों की दूकानें लग रही हैं। मुद्रा योजना से ग्रामवासी आत्मनिर्भर हो रहे हैं। सुकमा जिले के ग्राम पंचायत नागाराम की पंच सुश्री मुचाकी करूणा गांव की बैंक मित्र भी हैं। इनके पास बड़ी संख्या में ग्रामीण स्तर बैंक का खाता खुलवाने के लिए मदद लेने आते हैं। वे बताती हैं कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से इनकी पहचान बनी है। ग्रामीण आर्थिक सुदृढ़ीकरण के लिए जागरूक हो रहे हैं। आजीविका के लिए बाहर प्रान्तों के लिए कमाने-खाने के लिए जो ग्रामीण चले जाते थे, उनके लिए यह योजना वरदान सबित हो रही है। आजीविका के साधन अब गांव में ही मिल रहे हैं। वे कहती हैं कि किसी भी गाँव में लोगों का आर्थिक विकास, भविष्य में बड़े बदलाव और बेहतर व्यवस्थाओं का संकेत होता है. आर्थिक तंगी से उबर रहे ग्रामवासी भौतिक सुख-सुविधाओं के उपयोग के लिए तैयार हो रहे हैं. अब वे कमाने-खाने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों को अच्छी शिक्षा और युवाओं को रोजगार के लिए प्रशिक्षित करने की सोच भी रखते हैं और संसाधन मुहैया होते ही वे इस दिशा में अपने कदम बढ़ाते हैं. हमर छत्तीसगढ़ योजना में अध्ययन-भ्रमण यात्रा के अनुभव साझा करते हुए वे कहती हैं कि महानगर कभी देखे नहीं थे और न ही आधुनिक तकनीक से रूबरू होने का मौका मिला था. यहाँ आकर लग रहा है कि कोई सपना देख रहे हैं. सुदूर वनांचल क्षेत्रों में रहने वालों के लिए यहाँ आना एक बड़ा सुअवसर है. खेती-किसानी की नई पध्दति, विकास के नए आयाम, मनोरंजन के साधनों के बीच हमारे दो दिन कैसे गुजर गए, पता ही नहीं चला.


मछली पालन से समृद्ध हुआ स्व-सहायता समूह

महिलाओं को मिला रोजगार का साधन एक दिन ऐसा था, जब हमारी मदद करने वाला कोई नहीं था. जब कभी पैसो की जरुरत पड़ती तो गाँव के सेठ-साहूकार दुगने ब्याज पर कर्ज देते. सूद तो छोड़, ब्याज का भुगतान करने में ही पूरी कमाई चली जाती थी. अब वो दिन बीत गए. अब हम दूसरों को कर्ज देने लायक हो गए हैं. यह सब आपस की एकता से स्व-सहायता समूह के मछलीपालन से संभव हो सका है | हमर छत्तीसगढ़ योजना में अध्ययन-भ्रमण पर आई कोंडागांव जिले के विकासखंड फरसगांव के ग्राम पंचायत जगली की पंच श्रीमती वेदोश्री विश्वास बताती हैं कि सन 2014 में 10 महिला सदस्यों ने मिलकर स्व-सहायता समूह का गठन किया. सभी सदस्य 50 रुपये प्रति सप्ताह जमा करते थे. एक साल बाद सन 2015 में कोंडागाँव में हुए कृषक मेले में इन्हें मत्स्य पालन योजना के बारे में पता चला. तब समूह ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अंतर्गत 60 हजार रूपये ऋण लेकर गाँव के तीन तालाबों में मत्स्य पालन का कार्य प्रारम्भ किया. वे बताती हैं कि व्यवसाय अच्छा चलने लगा और आसपास के हाट बाज़ारो में समूह की सदस्य महिलाओं ने मछली बेचने का कार्य शुरु किया. हमने एकजुटता से कार्य करते हुए न केवल समूह को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि गाँव के जरूरत मंद गरीब लोगों को बहुत ही कम ब्याज दर पर ऋण देना शुरू किया. कम ब्याज पर कर्ज मिलने से उसे चुकाने में आसानी होती है. महिला स्व-सहायता समूह ने न केवल अपना विकास किया है, बल्कि ग्रामीणों की भी मदद कर रही है. हमर छत्तीसगढ़ योजना में अध्ययन-भ्रमण यात्रा के संबंध में अपने अनुभव साझा करते हुए वे कहती हैं कि बहुत ही प्रेरक योजना है राज्य सरकार की. राजधानी से काफी दूर हमारे क्षेत्र के प्रतिनिधि भी यहाँ आकर नई-नई चीजों, व्यवस्थाओं, योजनाओं से रूबरू हो रहे हैं. हम सोच भी नहीं सकते थे कि कभी इस तरह भ्रमण यात्रा पर जा सकेंगे, लेकिन राज्य शासन की योजना से यह सुअवसर मिला.


युवाओं की टोली दे रही स्वच्छता का संदेश

जिला मुख्यालय कोंडागांव से 17 किमी. दूर ग्राम बड़े कनेरा में इन दिनों स्वच्छता को लेकर चलाये जा रहे कार्यकर्मो के बारे में किसी ने भी सोचा नहीं था कि बच्चों के माध्यम शुरू किया गया जागरूकता कार्यक्रम ग्रामीणों के मध्य इस कदर लोकप्रिय और कारगर हो जाएगा. अभियान में बच्चों के साथ वर्तमान में गांव के युवा और अन्य ग्रामीण भी शामिल हो गए हैं. स्वच्छता दल आजकल ग्राम को स्वच्छ रखने के लिए गंदे नालों, बाज़ार स्थलों व सार्वजनिक स्थलों की साफ सफाई करता है. कोंडागांव जिले के ग्राम पंचायत बड़े कनेरा के पंच श्री प्रकाश चुर्गीय अपने साथियों के साथ हमर छत्तीसगढ़ योजना में अध्ययन-भ्रमण पर नया रायपुर आए. जहाँ उन्होंने बताया कि गाँव में स्वच्छता के लिए सिर्फ कचरे को साफ करने की नहीं, बल्कि जागरूकता की भी आवश्यकता है. इसी कड़ी में पारा, मोहल्लों में जाकर स्वच्छता संबंधित वीडियो प्रोजेक्टर के माध्यम से दिखाकर लोगों को जागरूक बनाने का प्रयास किया जा रहा है. ओडीएफ बनाने के लिए गड्ढा खोदने, लेआउट देकर जल्द से जल्द शौचालय बनाने के लिए राजमिस्त्रियो से बैठक लेकर निर्माण कार्य करवाया गया है. इसके चलते गाँव में 6 राजमिस्त्रीयों का दल कार्य कर रहा है. लगभग 2 माह में 600 शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है और ग्राम पंचायत को ओडीएफ गाँव का दर्जा मिल गया है. श्री चुर्गीय बताते हैं कि अब सभी ग्रामीण शौचालय का उपयोग कर रहे हैं. स्वच्छता के लिए यहाँ का कचरा बाहर ले जाने हेतु उन्होंने अपनी पंचायत की ओर से एक चारपहिया लगाया गया है, जिससे हर रविवार को 12 से 14 वर्ष के बच्चों और युवाओं की टोली गांव की हर जगह की गंदगी को साफ कर रही है. इससे अब स्वच्छता हेतु जागरूकता आ रही है. श्री चुर्गीय की मेहनत और बच्चों की लगन देखकर ग्रामीण गाँव में स्वच्छता के लिए प्रतिबध्द हो रहे हैं. इनका गाँव अब आसपास के अन्य गांवों के लिए प्रेरणा बन गया है और स्वच्छ भारत मिशन में सहभागीता निभा रहा है.


सौर ऊर्जा से रौशन हुआ गांव

ग्राम पंचायत कण्डा को अंधेरे से मिली राहत शाम ढलते ही ग्रामवासियों की परेशानी बढ़ जाती थी। चिमनी और दिये के सहारे देर रात तक घरेलू कार्य करना महिलाओं के लिए भी मुश्किल था और पढ़ने वाले बच्चों के लिए यह बड़ी समस्या थी। विद्युत व्यवस्था न होना कई तरह से विकास में बाधक बना हुआ था। शासन से कई बार मांग की गई थी और अधिकारियों से भी गुहार लगा चुके थे। सुदूर क्षेत्र होने की वजह से गांव तक विद्युत कनेक्शन पहुंच नहीं पा रहा था। ऐसे में क्रेडा विभाग ने सौर पैनल लगाकर गांव को अंधेरे से राहत दिलाई। हमर छत्तीसगढ़ योजना में अध्ययन-भ्रमण यात्रा पर आए बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के पंचायत प्रतिनिधियों ने राजधानी एवं नया रायपुर में विकसित स्थलों की सैर की। ग्राम पंचायत कण्डा के सरपंच श्री मधुवाराम बताते हैं कि हमारे गांव की आबादी लगभग 1500 है। ज्यादातर परिवार खेती-किसानी और मजदूरी कार्य से जुड़े हुए हैं। वर्तमान समय में सड़क, पानी और बिजली सभी की मूलभूत आवश्कता है। हमारे गांव में वर्षों से विद्युत व्यवस्था नहीं थी। लिहाजा शाम ढलने के बाद ग्रामवासी जैसे मजबूर हो जाते थे, अंधेरे में रात गुजारनी पड़ती थी। बिजली न होने से कामकाज पर खासा असर पड़ता रहता था। व्यवसाय करने वालों को भी काफी फर्क पड़ता था, देर तक दूकान खुली रखना संभव नहीं था. ग्रामवासी टीवी, पंखा एवं अन्य विद्युत चलित वस्तुओं का उपयोग नहीं कर पाते थे। इसके अलावा अंधेरे में घर से बाहर निकलना खतरे से खाली नहीं था। जहरीले जीव-जंतुओं के हमले का डर बना रहता था। वे बताते हैं कि आखिरकार राज्य शासन ने राज्य अक्षय ऊर्जा अभिकरण के माध्यम से हमारे गांव में सौर पैनल लगवाए। सन् 2014 में गांव में 312 परिवारों के आवास में सौर पैनल से बिजली पहुंची, तो ग्रामवासियों में खुशी की लहर छा गई। गांववालों की बहुत सी समस्याएं इससे दूर हुईं। स्कूली बच्चों को रात में पढ़ने के लिए सुविधा हो गई। वहीं टीवी, पंखे एवं मोबाईल का उपयोग भी शुरू हो गया, जिससे वे देश-दुनिया से जुड़ने लगे। दिन में सूर्य की रौशनी तो मिलती ही है, अब रात में भी हमारे लिए सूर्य की ऊर्जा वरदान साबित हो रही है। जिन गांवों में विद्युत व्यवस्था नहीं पहुंचाई जा सकी है, वहां के लिए सौर ऊर्जा से बिजली उत्पन्न कर, अंधेरा दूर करने की यह प्रशंसनीय पहल है। राज्य शासन की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों और क्षेत्रवासियों को मिलता रहा है। मामूली खर्च पर बिजली सुविधा मिलने से ग्रामवासियों पर आर्थिक भार भी नहीं पड़ता है।


बीपीएल परिवारों को एकलबत्ती सुविधा

ग्राम पंचायत तुमनार में दूर हुई विद्युत समस्या बदलते समय के साथ विद्युत व्यवस्था सबकी जरूरत है। ऐसे में हमारे गांव के आधे से अधिक घरों में बिजली न होना बहुत खलता था। ग्रामवासी शाम होते ही अपने घरों में दुबक जाते थे, बाहर निकलना मुश्किल हो जाता था। अंधेरे में जहरीले एवं हिंसक जीव-जंतुओं का डर लगा रहता था। बिजली बिल नहीं भर सकते थे, इसलिए असुविधाओं के बीच जीवन गुजार रहे थे। राज्य शासन की एकलबत्ती योजना से बीपीएल परिवारों को लाभ मिला और उनके घर का अंधेरा दूर हुआ। जिला मुख्यालय बीजापुर से 10 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत तुमनार से हमर छत्तीसगढ़ योजना में अध्ययन-भ्रमण यात्रा पर रायपुर आए पंच श्री दशरथ तेलाम बताते हैं कि हमारे गांव की की आबादी करीब 2500 है। अधिकतर ग्रामवासी कृषि एवं वनोपज पर निर्भर हैं। ज्यादातर मध्यम एवं गरीब परिवार हैं। आर्थिक रूप से सशक्त नहीं होने के कारण ऐसे परिवार बिजली व्यवस्था का लाभ नहीं ले पाते थे। महंगाई की वजह से गांव के 250 घरों में बिजली नहीं थी, जिससे उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था। गरीब परिवार रात के अंधकार में चिमनी से सहारे के लिए मजबूर थे। गांव की गलियों में भी ज्यादातर अंधेरा रहता था, क्योंकि ग्राम पंचायत बिजली का बिल भुगतान करने में समर्थ नहीं थी। वे बताते हैं कि गांव के 250 बीपीएल परिवारों के आवास में सन् 2013-14 में बीपीएल एकलबत्ती कनेक्शन लगाया गया। जिसके बाद यह समस्या दूर हुई। मुख्यमंत्री बीपीएल एकलबत्ती कनेक्शन के चलते इन घरों में अब 40 यूनिट तक निःशुल्क बिजली दी जा रही है। ग्रामवासियों ने अपने घरों में मीटर भी लगवा लिया है। एकलबत्ती कनेक्शन से उन्हें बिजली का महत्व समझ आ गया है। बच्चों के पढ़ने लिखने से लेकर विभिन्न साधनों के उपयोग हेतु बिजली की आवश्यकता पूरी हो रही है। वहीं गांव के 20 एपीएल परिवारों के यहाँ सोलर पैनल लगाए गए हैं। जिससे अब कोई भी घर विद्युत सुविधा से वंचित नहीं है।


स्वच्छता अभियान से गांव को मिली नई पहचान

ओडीएफ ग्राम पंचायत छुरावण्ड को मुख्यमंत्री ने दिया स्वच्छता सम्मान हमारा छोटा सा गांव, जिसकी कोई पहचान नहीं थी, पड़ोसी गांव के लोग ठीक से जानते नहीं थे। अब स्वच्छता के नाम से जिले भर में लोग जानने लगे हैं। पंचायत प्रतिनिधियों के आपसी समन्वय और ग्रामवासियों के सहयोग से सभी घरों में शौचालय निर्माण हो गया है और गांव को ओडीएफ घोषित किया गया है। मुख्यमंत्री के हाथों जब स्वच्छता सम्मान मिला, तो ग्रामवासियों की खुशियों का ठिकाना न रहा। बस्तर जिले के ग्राम पंचायत छुरावण्ड की आबादी लगभग एक हजार दो सौ है। पंचायत में 337 घर हैं, जिसमें सभी घरों में शौचालय निर्माण हो गया है। ग्रामवासी खुले मैदान, खेत या तालाब में दिशा मैदान जाने की बजाय अपने घर में बने शौचालय का उपयोग कर रहे हैं। इससे गांव पूरी तरह खुले में शौचमुक्त हो गया है। साथ ही हर गली में मनरेगा के तहत नाली निर्माण कराया गया है, जिससे गांव में गंदा, दूषित पानी बहने की समस्या दूर हुई है। छुरावण्ड के सरपंच श्री मंगलराम नेताम बताते हैं कि स्वच्छ भारत अभियान की शुरूआत के पूर्व ज्यादातर लोग शौच के लिए खुले में जाते थे, इससे मैदान, खेतों एवं तालाबों के किनारे गंदगी का वातावरण हो जाता था। स्वच्छता अभियान के तहत् गांव के 337 घरों शौचालय निर्माण कराया गया। अशिक्षा, कई अंधविश्वासों और आदत के चलते कई लोग शौचालय का उपयोग ही नहीं करते थे। तब सभी पंचों तथा गांव के शिक्षितों, मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका आदि की मदद से स्वच्छता टीम बनाई। टीम के सदस्य सुबह-शाम खुले मैदानों और तालाबों, सड़कों के किनारे पहरा देने लगे, जहां अक्सर लोग खुले में शौच के लिए जाते थे। ऐसे ग्रामीणों को पहले समझाईश दी गई। बार-बार समझाने के बावजूद नहीं मानने पर ग्राम पंचायत में 500 रूपये अर्थदण्ड का प्रावधान किया गया। जुर्माने के डर से खुले में जाना बंद कर दिया। शौचालय का इस्तेमाल करना शुरू किया। अब गांव पूरी तरह से ओडीएफ हो चुका है। सरपंच श्री नेताम बताते हैं कि गांव में कच्ची सड़कें और नाली नहीं होने से बरसात में बहुत ही दिक्कत होती थी। बारिश के पानी से सड़कों पर कीचड़ हो जाती थी और गड्ढों में जमा पानी से मच्छर और कीटाणु पनपने लगते थे। तब मनरेगा योजना के तहत सीसी रोड निर्माण और नाली निर्माण कराया गया। इससे घरों से निकलने वाला गंदा पानी नाली के जरिये सीधे गांव के बाहर चले जाता है। 30 लाख की लागत से हुए इस नाली निर्माण से गांव अब स्वच्छता सम्पन्न और शुध्द वातावरण हो गया है। बड़े प्रयास के बाद ग्रामवासियों में जागरूकता आई कि गंदगी से हमें क्या नुकसान है। गांव की स्थिति का निरीक्षण करने जिले से स्वच्छता टीम आई और हमारे गांव को दूसरे नम्बर पर ओडीएफ घोषित किया गया। विगत 17 फरवरी 2017 को जगदलपुर जिले के तुरेनार में हुए सम्मान समारोह में हमारी पंचायत को मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह जी ने स्वच्छता सम्मान प्रमाण पत्र तथा 30 हजार रूपये इनाम के तौर पर दिया। गांव को स्वच्छता सम्मान मिलने की चर्चा पूरे जिले में हुई और लोग हमारे गांव को भी जानने-पहचानने लगे हैं।


गौशाला में बेसहारा पशुओं को मिला ठिकाना

जैविक खाद निर्माण, दुग्ध उत्पाद से ग्रामवासियों को लाभ पालतू पशुओं यथा गाय, भैंस, बकरी आदि को खुला छोड़ देने के बाद लोग ध्यान नहीं देते. ऐसे जानवरों द्वारा खेतों की फसल चरने से किसानों को बहुत नुकसान हो जाता था, साथ ही पशुधन की भी हानि होती रहती है। इस समस्या से निपटने के लिए पशुधन मित्र योजना से बेहद मदद मिली, जब शासन के नियमों के अनुसार गांव में ही गौशाला निर्माण कराया गया। इससे लावारिस घूमने वाले जानवरों को ठिकाना मिला और हम ग्रामवासियों को जैविक खाद एवं दुग्ध उत्पाद का लाभ। गरियाबंद जिले के विकासखंड फिंगेश्वर अंतर्गत ग्राम पंचायत कोपरा की सरपंच श्रीमती डाली साहू बताती हैं कि हमारे गांव की आबादी करीब 6 हजार है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेती-किसानी से जुड़े होने के कारण अधिकांश परिवारों में गाय-भैंस, बकरी आदि पालने की परंपरा है। गाय का महत्व पुरातन काल से हमारे देश में है। कई त्योहारों, अवसरों पर इसकी पूजा की जाती है। हमारे जीवन में गाय के दूध का भी बहुत महत्व है और इसकी तुलना अमृत से की गई है। गांव में यहां-वहां घूमते पालतू पशुओं को कई-कई दिन तक ठीक से चारा, भोजन नहीं मिल पाता। इससे वे शारीरिक रूप से कमजोर हो जाते हैं। कई बार तो इन्हें कांजी हाउस या गौशाला भेज दिया जाता है। वे बताती हैं कि गांव में पालतू पशुओं के लिए कोई आश्रय स्थल नहीं था। इसलिए गाय या भैंस के पकड़े जाने पर उन्हें 15 किलोमीटर दूर सिरकट्टी गांव के कांजी हाउस, गौशाला या फिर 40 किलोमीटर दूर धवलपुर पंचायत के गौशाला भेजना पड़ता था। गरियाबंद में हुए एक कृषक सम्मेलन में उन्हें पशुधन मित्र योजना के बारे में पता चला कि पालतू पशुओं के संरक्षण, विकास और देखभाल हेतु अनुदान राशि का प्रावधान है। हमने पशुधन विकास विभाग में आवेदन दिया, जिसके पश्चात योजना के तहत् 5 लाख की राशि गौशाला निर्माण हेतु अनुदान मिला। गांव की 5 एकड़ भूमि पर गौशाला निर्माण कराया गया। पिछले छह माह से अब गांव का कोई पालतू पशु गाय, बैल, भैंस लावारिस नहीं घूमते। ऐसे जानवरों को अब गौशाला में रखा जाता है। सरपंच श्रीमती साहू बताती हैं कि गौशाला निर्माण से दो फायदे हुए। एक तो पालतू पशुओं को रहने-खाने और चारे के लिए भटकना नहीं पड़ता। दूसरा उनके गोबर से जैविक खाद निर्माण किया जा रहा है, जिससे गांव के किसानों को अपने खेतों में रासायनिक खाद के उपयोग से छुटकारा मिल रहा है। गौशाला की देखरेख एवं संचालन के लिए ग्रामवासियों के सहयोग से एक समिति गठित की गई है, समिति के सदस्यों को मानदेय भी दिया जाता है। प्रायः दूध एवं दही का उपयोग ज्यादातर लोग करते हैं। गौशाला में पशुओं से मिले दूध से डेयरी उत्पाद भी बनाए जा रहे हैं। हमर छत्तीसगढ़ योजना में अध्ययन-भ्रमण के दौरान मिले अनुभव साझा करते हुए वे कहती हैं कि राज्य सरकार की यह योजना बहुत ही उद्देश्य पूर्ण है। यहां भ्रमण, अध्ययन, मनोरंजन और प्रेरणा मिली है। ज्यादातर प्रतिनिधियों के लिए यह सपने जैसा है, क्योंकि दो दिनों में ही इतने सारे विकसित स्थलों का भ्रमण किसी भव्य यात्रा से कम नहीं होता। खासकर महिलाएं अपने गांव-घर से बाहर नहीं निकल पाती हैं, उनके लिए यह योजना बड़ी फायदेमंद है।