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एक पंथ दो काज - गाँव की जरूरत पूरी, महिलाओं को आर्थिक लाभ

एक पंथ दो काज - गाँव की जरूरत पूरी, महिलाओं को आर्थिक लाभ
मत्स्य पालन के माध्यम से स्व-सहायता समूह को मिला रोजगार हमारा पंचायत बेहद जागरूक है. मुख्यतः गाँव की महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए अथक प्रयास कर रही हैं। महिला सशक्तिकारण के दौर में सभी एकजुट होकर विभिन्न उपक्रमों के जरिये आर्थिक बदहाली दूर करने में जुटी हुई हैं. कोरबा जिले के ग्राम पंचायत पुटी पखना के सरपंच श्री चन्द्रप्रताप पोर्ते बताते हैं कि हमारे गांव में जय मां मातिन दाई महिला स्व-सहायता समूह है,जिसमें 12 महिला सदस्य हैं. इस समूह की अध्यक्ष श्रीमती फुलबसिया पेंद्रो हैं. समूह शासन के नियमों के तहत पंजीकृत है. समूह के सदस्यों ने दो तालाबों में मछली पालन शुरू किया है, जिसमें एक तालाब 5 एकड़ एवं दूसरा तालाब 7 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है. समूह को मछली पालन की प्रेरणा जनपद पंचायत से मिली. पंचायत की बैठक में मत्स्य पालन के संबंध में जानकारी दी गई। समूह के सदस्यों को मत्सय पालन का प्रशिक्षण नवम्बर 2016 में दिया गया। अब इस समूह की सदस्य महिलाएं समय-समय पर मत्सय विभाग से सहयोग से जानकारियों से अवगत होती रहती हैं. वे कहते हैं कि महिला स्व-सहायता समूह में सभी सदस्य गरीब परिवार से संबधित हैं. घर का कामकाज, चूल्हा-चौका, बच्चों की देखभाल में ही इनका अधिकतर समय गुजर जाता था. साथ ही आर्थिक रूप से भी वे सशक्त नहीं थीं. ग्राम पंचायत के प्रयास से और इन महिलाओं की इच्छाशक्ति की वजह से जय मां मातिन दाई समूह का गठन हुआ और महिलाओं ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में कदम रखा. मछली पालन करने से पहले शासन की योजना के तहत इन दो तालाबों का सौन्दर्यीकरण कराया गया। सरपंच ने बताया कि बाजार में 400 रूपये प्रतिकिलो में मछली बीज मिलता है, समूह के सदस्यों द्वारा अगस्त में मछली बीज तालाब में डाला जाता है. फरवरी-मार्च में मछली निकालते हैं और बाजार में उचित दर पर विक्रय कर देते हैं। समूह को नवम्बर 2016 में कोरबा के मत्स्य विभाग के सहयोग से छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक से ऋण मिला. मत्स्य व्यवसाय से जो आमदनी होती है, उससे सभी सदस्यों को आर्थिक लाभ मिलता है. साथ ही फिर से मछली बीज भी खरीदते हैं. अपने क्षेत्र के बारे में चर्चा करते हुए सरपंच श्री पोर्ते ने बताया कि हमारे क्षेत्र में बड़ी संख्या में आदिवासियों की जनसंख्या है. इन परिवारों में मछली विशेष तौर पर बेहद पसंद की जाती है. ग्रामीणों के लिए मत्स्य पालन व्यवसाय का एक अच्छा जारिया है. गाँव की महिलाओं को समय रहते यह बात समझ में आई कि क्यों न हम ऐसा व्यवसाय करें, जिससे ग्रामवासियों की भी जरूरत पूरी हो और हमें भी आर्थिक लाभ मिले।